Dhara 124A kya hai?

धारा 124a गैर जमानती अपराध है जिसमे उम्र क़ैद और जुर्माना या 3 साल की जेल और जुर्माना या सिर्फ जुरमाना लग सकता है।

अगर कोई भी व्यक्ति सरकार के खिलाफ कुछ लिखता है या बोलता है या लिखने बोलने वाले का समर्थन करता है, या अपने लिखे गए या बोले गए शब्दों, या फिर चिन्हों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष (Direct or indirect) तौर पर नफरत फैलाता है या असंतोष जाहिर करता है, तो वह देशद्रोह का अपराधी है। धारा 124a एक कॉग्निजबल और गैर जमानती अपराध है जिसमे उम्र क़ैद और जुर्माना या  3 साल की जेल और जुर्माना या सिर्फ जुरमाना लग सकता है।

क्या है इस कानून का इतिहास? : यह कानून आज से नहीं बल्कि अंग्रेजों के जमाने का है और आजादी के पहले से भारत में मौजूद है. यह कानून अंग्रेजों ने 1860 में बनाया था और 1870 में इसे आईपीसी में शामिल कर दिया गया. उस वक्त अंग्रेज इस कानून का इस्तेमाल उन भारतीयों के लिए करते थे, जो अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाते थे. आजादी की लड़ाई के दौरान भी देश के कई क्रांतिकारियों और सैनानियों पर यह केस लगाया गया था. 

आजादी से पहले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और लोकमान्य तिलक को भी इस कानून के चलते सजा सुनाई गई थी. तिलक को 1908 में उनके एक लेख की वजह से 6 साल की सजा सुना दी गई थी. वहीं महात्मा गांधी को भी अपने लेख की वजह से इस कानून का आरोपी बनाया गया था. हालांकि आजाद भारत में इस कानून में कई बदलाव भी किए गए हैं.

हालांकि कई बार सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून को लेकर टिप्पणी की है. 1962 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि नारेबाजी करना देशद्रोह के दायरे में नहीं आता. वहीं कई ऐसे मामले हैं, जिनमें कोर्ट ने सरकार या प्रशासन के खिलाफ उठाई गई आवाज को राजद्रोह के अधीन नहीं माना है. अगर हाल ही के चर्चित मामलों की बात करें तो पिछले सालों में काटूर्निस्‍ट असीम त्रिवेदी, हार्दिक पटेल, कन्हैया कुमार आदि को इस कानून के तहत ही गिरफ्तार किया गया है. 

इसे खत्म करने के पीछे क्या है तर्क? : इस कानून को लंबे समय से खत्म करने की बात की जा रही है. कई जानकारों का मानना है कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का दमन करता है और इसका दुरुपयोग भी हो रहा है. वहीं संविधान की धारा 19 (1) ए में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध भी लगे हुए हैं, तो इसकी आवश्यकता नहीं है.

208 Views