Giving a lift to an unknown person is illegal

अगर आप भी किसी को लिफ्ट देते है तो ये एक बार ज़रूर पढ़े। किसी को लिफ्ट देना एक क्राइम है जिसमे आपको 5000 तक का जुरमाना

भारत में ऑटोमोबाइल मार्केट बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है. कई शहरों जैसे पुणे में तो इंसानों से ज्यादा गाड़ियां हो गई हैं. और भारत में जितने प्रकार की गाड़ियां हैं उतने ही तरह के नियम भी हैं. और कुछ नियम इतने अजीब हैं कि उनके बारे में सुनकर लगता है कि सिर पीट लो.

ज़रा गौर करिए.. अगर तेज़ बारिश में आपको रास्ते में कोई बुजुर्ग दिखे जिसे अपनी गाड़ी में घर छोड़ने के लिए आप जाएं और उस मदद के बदले आपको कोर्ट के चक्कर काटने पड़े तो क्या होगा? मुंबई के नितिन नायर के साथ ये ही हुआ.

नितिन नायर ने 22 जून को फेसबुक पर एक पोस्ट की थी. उस पोस्ट में उन्होंने बताया कि भारत का एक नियम ऐसा है जिससे कार में किसी को लिफ्ट देने वाले परेशान हो सकते हैं. निखिल ने इस पोस्ट में बताया कि, 'मेरी तरह कई कार ओनर को ये नहीं पता होगा. इसकी जानकारी मैं देना चाहता हूं. मैं सिर्फ लोगों की मदद करने के लिए कोर्ट में फाइन देकर आया हूं.'

'सोमवार यानी 18 जून को जब मैं अपने ऑफिस जा रहा था तो मैंने एरोली सर्कल पर कुछ और लोगों को देखा जो तेज़ बारिश में लिफ्ट लेने की सोच रहे थे. क्योंकि सारे पब्लिक ट्रांसपोर्ट या तो भरे हुए थे या लेट थे. उन लोगों में से एक 60 साल से ऊपर के बुजुर्ग भी थे और बाकी दो किसी आईटी कंपनी में काम करते होंगे. मैंने रोड के साइड में गाड़ी खड़ी की और उन्हें लिफ्ट दी क्योंकि जहां उन्हें जाना था वो जगह मेरे काम के रास्ते में थी.'

जैसे ही वो अंदर आए एक ट्रैफिक पुलिस वाले ने मुझे रोका, मुझे लगा कि वो इसलिए बुला रहा है क्योंकि मैंने नो पार्किंग में पार्क कर दिया. पुलिस ऑफिसर ने उसके बाद रसीद फाड़ी और मेरा लाइसेंस ले लिया. उससे कारण पूछा तो बताया कि किसी अनजाने को गाड़ी में लिफ्ट देना कानूनन अपराध है. मुझे लगा कि वो बस पैसे के लिए मुझे उल्लू बना रहा है, लेकिन उसने रसीद दी. अगले दिन पुलिस स्टेशन आकर फाइन देने को भी कहा.'

'अगले दिन मैं पुलिस स्टेशन गया तो वहां पता चला कि लाइसेंस छुड़वाने के लिए कोर्ट जाना पड़ेगा. और मुझपर धारा 66/192 के तहत कार्यवाही हुई है. मैंने इसके लिए अपने एक वकील दोस्त से पूछताछ भी की पर उसने भी मुझे यही बोला कि लिफ्ट देना गैरकानूनी है.'

'आज 22 जून को मुझे कोर्ट 10 बजे कोर्ट जाना था. मैं वहां गया और 1 बजे तक बैठा रहा. 1 बजे मुझे कोर्ट रूम में बुलाया गया और जज के सामने वकीलों के बीच अपनी गलती माननी पड़ी. मुझपर 2000 का जुर्माना भी लगा था और कई बार मिन्नतें करने पर मुझे 1500 रुपए ही देने पड़े यानी 500 रुपए की छूट. इसके बाद मैं फिर पुलिस स्टेशन गया 2 बजे के आस-पास और 3 बजे पुलिस वालों का लंच टाइम खत्म होने के बाद मुझे आने को कहा. मैं फिर गया और आखिरकार 5 बजे मुझे मेरा लाइसेंस मिला. हमारे देश का ऐसा कानून है इसीलिए शायद सड़क पर लोगों को मरता देख भी कोई मदद नहीं करता.'

क्या था ये कानून? : नितिन नायर पर सेक्शन 66(1) की धारा 192(a) के तहत चार्ज लगा है जो असल में लिफ्ट लेने से रोकने के लिए नहीं बल्कि प्राइवेट गाड़ियों का बिना परमिट ट्रांसपोर्टेशन में इस्तेमाल किए जाने को लेकर है.

ये नियम असल में ये नहीं कहता कि किसी को लिफ्ट न दी जाए और किसी की मदद न की जाए बल्कि इस नियम में सिर्फ यही लिखा है कि बिना परमिट कोई भी अपनी गाड़ी का इस्तेमाल ट्रांसपोर्ट गाड़ी की तरह नहीं कर सकता और नितिन नायर का केस अपवाद समझा जा सकता है जिसमें उन्हें शायद गलत समझ लिया गया हो.

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